नया शहर हो, नई नौकरी या फिर बस पुरानी जगह से बोर होकर नया आशियाना ढूंढना, किराए का घर खोजना अपने आप में एक अलग ही एडवेंचर है। सुनने में लगता है कि ब्रोकर से बात करेंगे, दो-चार मकान देखेंगे और बात बन जाएगी। लेकिन हकीकत थोड़ी अलग है!
एक बढ़िया और सुकून वाला घर मिलना सिर्फ किस्मत का खेल नहीं है, इसके लिए थोड़ी सी स्मार्टनेस और सही प्लानिंग चाहिए होती है। अक्सर लोग जल्दबाजी में कोई भी रेंट पर घर फाइनल कर लेते हैं और बाद में पानी की किल्लत या फालतू के खर्चों से परेशान होते रहते हैं। तो अगर आप भी घर किराए पर लेना चाहते हैं, तो पहले इन जरूरी बातों का ध्यान रखें।
अपना बजट पहले तय करें
घर ढूंढने की रेस में भागने से पहले अपनी जेब का साइज़ नापना बहुत जरूरी है। बिना बजट तय किए घर देखने निकलोगे, तो सिर्फ पैर थकेंगे और वक्त बर्बाद होगा।
1. मासिक किराया
आपके घर का किराया आपकी इन-हैंड सैलरी के 30% से ज्यादा नहीं होना चाहिए। अगर सैलरी 50,000 है, तो कोशिश करो कि किराया 15,000 के अंदर ही सिमट जाए।
2. सिक्योरिटी डिपॉजिट
हमारे देश में मकान मालिक कदम रखते ही 'सिक्योरिटी डिपॉजिट' मांगते हैं। कुछ शहरों में यह 2 महीने का होता है, तो कुछ जगह 5-10 महीने का भी हो जाता है। इसलिए यह तगड़ी रकम पहले ही अलग रख लो।
3. मेंटेनेंस और अन्य खर्च
सिर्फ किराया ही सब कुछ नहीं होता। हर महीने आने वाला बिजली का बिल, पानी का खर्चा और सोसाइटी का मेंटेनेंस चार्ज, इन सब का हिसाब भी अपने बजट में जोड़कर चलो।
सही लोकेशन कैसे चुनें?
घर कितना भी आलीशान हो, अगर वह दुनिया के किसी कोने में है जहाँ से ऑफिस जाने में ही आपके 3 घंटे निकल जाएं, तो उस घर का कोई फायदा नहीं है।
1. ऑफिस या कॉलेज की दूरी
रोज-रोज ट्रैफिक में फंसकर अपनी एनर्जी और वक्त क्यों बर्बाद करना? कोशिश करो कि घर आपके ऑफिस या कॉलेज के जितना हो सके पास हो।
2. सार्वजनिक परिवहन
अगर आपके पास खुद की गाड़ी नहीं है, तो चेक कर लो कि घर के पास मेट्रो स्टेशन, बस स्टॉप या ऑटो स्टैंड है या नहीं।
3. स्कूल, अस्पताल और बाजार की उपलब्धता
किराना दुकान, सब्जियां, दवाइयां और इमरजेंसी के लिए अस्पताल घर के पास ही होने चाहिए।
4. इलाके की सुरक्षा
शिफ्ट होने से पहले उस इलाके में शाम को एक चक्कर मारकर देखो। वहां के चाय वाले या किसी पड़ोसी से पूछ लो कि इलाका सुरक्षित तो है ना? खासकर लड़कियों या अकेले रहने वालों के लिए यह सबसे जरूरी है।
घर देखने के दौरान क्या जांचें?
जब मकान मालिक या ब्रोकर आपको किराए का मकान दिखाए, तो सिर्फ दीवारों का पेंट देखकर खुश मत हो जाना। अपनी जासूसी नजरें चालू करो और ये चीजें जरूर चेक करो:
1. पानी और बिजली की व्यवस्था
नल खोलकर देखो कि पानी का प्रेशर कैसा है। क्या पानी 24 घंटे आता है या सिर्फ सुबह-शाम? सॉकेट्स और वायरिंग ठीक हैं या नहीं?
2. वेंटिलेशन और प्राकृतिक रोशनी
घर में नेचुरल रोशनी और ताजी हवा आनी चाहिए। बंद-बंद कमरों में रहने से बीमारियां भी होती हैं और दिन भर लाइट जलानी पड़ेगी जिससे बिजली का बिल आसमान छुएगा।
3. दीवारों और छत की स्थिति
दीवारों और छत के कोनों को ध्यान से देखो। अगर सीलन है, तो बारिश के दिनों में घर में बदबू आएगी और सामान भी खराब होगा।
4. बाथरूम और किचन की गुणवत्ता
फ्लश ठीक से काम कर रहा है या नहीं? सिंक का पानी जाम तो नहीं होता? ये छोटी-छोटी चीजें बाद में बड़ा सिरदर्द बनती हैं। इसलिए उनको ज़रूर चेक करें।
5. पार्किंग की सुविधा
अगर आपके पास कार या बाइक है, तो किरायेदार के अधिकार में पार्किंग की जगह मिलेगी या सड़क पर ही गाड़ी लावारिस छोड़नी पड़ेगी, ये ज़रूर पता करें।
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रेंट एग्रीमेंट में क्या-क्या होना चाहिए?
House on rent लेते वक्त लिखित एग्रीमेंट होना बेहद जरूरी है। इसमें ये बातें साफ-साफ लिखी होनी चाहिए:
1. किराए की राशि
महीने की किस तारीख को कितना किराया देना है और 11 महीने बाद किराया कितने प्रतिशत (%) बढ़ेगा, यह पहले ही लिखवा लो।
2. सिक्योरिटी डिपॉजिट
जब आप घर खाली करोगे, तो मकान मालिक कितना पैसा काटकर वापस करेगा? अक्सर मकान मालिक पेंटिंग चार्जेस के नाम पर पैसे काट लेते हैं, इसलिए यह बात एग्रीमेंट में साफ होनी चाहिए।
3. लॉक-इन पीरियड
लॉक-इन का मतलब है कि आप तय समय (जैसे 6 महीने) से पहले घर नहीं छोड़ सकते।
4. नोटिस पीरियड
नोटिस पीरियड यह तय करता है कि घर खाली करने से कितने दिन पहले (आमतौर पर 1 महीना) आपको मकान मालिक को बताना होगा।
5. मेंटेनेंस की जिम्मेदारी
रिपेयरिंग का खर्चा कौन उठाएगा? अगर गीजर खराब हो गया या छत टपकने लगी, तो उसे ठीक कराने का पैसा कौन देगा, आप या मकान मालिक? यह पहले ही तय कर लो।
किराए का घर चुनते समय होने वाली आम गलतियां
बहुत से लोग सिर्फ एक घर देखकर जल्दबाजी में फैसला कर लेते हैं। किराए का घर लेने से पहले क्या देखेंयह तो सब पता कर लेते हैं, पर किन गलतियों से बचे यह जानना भी ज़रूरी है।
मकान मालिक की पहचान वेरीफाई किए बिना एडवांस दे देना
बिना एग्रीमेंट के मौखिक बातचीत पर भरोसा कर लेना
लोकेशन या बजट को नजरअंदाज करना
घर की असली कंडीशन न परखना
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ऑनलाइन किराए का घर खोजते समय किन बातों का ध्यान रखें?
1. प्रॉपर्टी की जानकारी सत्यापित करें
पहला ही घर देखा और पसंद आ गया तो तुरंत हां कर दी, ऐसा ना करें। कम से कम 3-4 विकल्प जरूर देखो।
2. फर्जी लिस्टिंग से बचें
आजकल ऑनलाइन बहुत स्कैम चल रहे हैं। जब तक खुद जाकर घर न देख लो और मकान मालिक से मिल न लो, तब तक एक रुपया भी एडवांस मत देना।
3. मालिक या एजेंट की पहचान जांचें
क्या जो इंसान आपको घर किराए पर दे रहा है, वही असली मालिक है? उसकी आईडी और घर के कागज एक बार जरूर वेरिफाई करो।
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निष्कर्ष (Conclusion)
घर किराए पर लेना एक बड़ा फैसला है, जल्दबाजी न करें। बजट, लोकेशन, घर की कंडीशन और रेंट एग्रीमेंट, इन सबका ध्यान रखकर ही किराए का घर लें।
FAQs
1. किराए का घर लेने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
बजट, लोकेशन, घर की कंडीशन, और रेंट एग्रीमेंट की शर्तों को ध्यान से देखना चाहिए।
2. रेंट एग्रीमेंट में क्या-क्या शामिल होना चाहिए?
किराए की राशि, सिक्योरिटी डिपॉजिट, लॉक-इन पीरियड, नोटिस पीरियड और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी।
3. सिक्योरिटी डिपॉजिट कितना देना चाहिए?
सिक्योरिटी डिपॉजिट आमतौर पर 2 से 3 महीने के किराए के बराबर होता है।
4. किरायेदार के क्या अधिकार और जिम्मेदारियां होती हैं?
Tenant rights India के तहत किरायेदार को समय पर नोटिस, प्राइवेसी और सुरक्षित रहने की जगह का अधिकार है, वहीं समय पर किराया चुकाना उसकी जिम्मेदारी है।
5. ऑनलाइन किराए का घर खोजते समय किन बातों का ध्यान रखें?
प्रॉपर्टी की जानकारी वेरीफाई करें, फर्जी लिस्टिंग से बचें और मालिक/एजेंट की पहचान जांचें।
6. बिना रेंट एग्रीमेंट के किराए पर रहना सुरक्षित है?
नहीं, बिना एग्रीमेंट के house on rentलेना विवाद का कारण बन सकता है।














